हाइलाइट्स

स्टीव एडकॉक 35 की उम्र में हो गए रिटायर.
रिटायरमेंट के लिए उन्होंने सेव कर लिए थे 8 करोड़ रुपये.
कमाने के लिए कभी लॉटरी और गैम्बलिंग का नहीं लिया सहारा.

नई दिल्ली. अमेरिका के रहने वाले स्टीव एडकॉक इन दिनों खबरों में हैं. वजह है उनका न्यूज़लेटर जिसमें वो पैसे बचाने के टिप्स देते हैं. न्यूज़लेटर का नाम है मिलियनेयर हैबिट्स. वो इसी नाम की एक किताब भी लिख चुके हैं.

दरअसल, स्टीव 2016 में रिटायर हो गए थे, मात्र 35 की उम्र में. रिटायरमेंट के वक्त उन्होंने एक मिलियन डॉलर यानी आठ करोड़ रुपये से ज्यादा जमा कर लिए थे. उनका कहना है कि कंजूस होने और किफायती होने में अंतर है, वो किफायत से चलते हैं और ऐसे ही उन्होंने पैसे सेव कर लिए.

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वो कहते हैं कि जब आप अपने खर्चों को कम करने जाते हैं तो आपको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई ऐसी चीज़ों को छोड़ना पड़ता है जिनके बिना जीना एक समय पर आपको मुश्किल लगता था. CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टीव कहते हैं कि रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू करने से पहले उन्हें लगता था कि वो स्पोर्ट्स चैनल देखे बिना नहीं रह सकते हैं. लेकिन प्लानिंग के तहत उन्होंने घर का केबल कटवा दिया और आज वो बिना किसी स्पोर्ट्स चैनल के बड़े आराम से रह लेते हैं.

किस तरह बचाए पैसे?
स्टीव बताते हैं कि पैसे बचाने के लिए उन्होंने बाहर खाने-पीने पर होने वाला अपना खर्च कम कर दिया. उनका कहना है कि आपको ये समझना होगा कि आपके लिए क्या जरूरी है. स्टीव सोचते थे कि उनका हर खर्च उनके गोल तक पहुंचने से उन्हें रोक रहा है. अगर आप 10 साल में रिटायर होना चाहते हैं तो हो सकता है कि एक छुट्टी के बदले आपको छह महीने एक्स्ट्रा काम करना पड़े.

वो कहते हैं कि अगर कोई चीज़ आपको अपने लिए जरूरी लगती है, तो उस पर बिल्कुल खर्च करें. लेकिन अगर वो जरूरी नहीं है तो पैसे खर्च करना पैसों की बर्बादी है. हालांकि, उनका ये भी मानना है कि अगर अर्ली रिटायरमेंट के लिए पैसे जमा करते हुए आपको कंजूसी करनी पड़ रही है तो उसका भी मतलब नहीं है. आपको सही बैलेंस ढूंढना होगा.

कभी नहीं खरीदी लॉटरी की टिकट
स्टीव मानते हैं कि लॉटरी लेने पर हो सकता है कि आप कभी पैसे जीत जाएं. वो कहते हैं कि ये सच है कि आप नहीं खेलेंगे तो जीतेंगे भी नहीं. लेकिन खेलने पर भी ज्यादातर बार आपके हाथ जीत नहीं लगेगी. इसके साथ ही वो कहते हैं कि बेटिंग या गैम्बलिंग में पैसे लगाने का भी रिस्क यही है, कि जीते तो जीते. पर हार गए तो नुकसान. इसलिए वो कभी भी लॉटरी या बेटिंग में पैसे नहीं लगाते.

एक्सटेंडेड वॉरंटी है पैसों की बर्बादी
किसी भी सामान पर कंपनी तब तक की वॉरंटी देती ही है जितने समय तक वो बिना किसी दिक्कत के चल सकता है. एक्सटेंडेड वॉरंटी अक्सर कई ऐसे टर्म्स एंड कंडीशंस के साथ आती है जिसमें सामान को पर्याप्त कवरेज नहीं मिलता है. ऐसे में हो सकता है कि आप एक्सटेंडेड वॉरंटी में भी पैसे खर्च कर दें और बाद में सामान ठीक करवाने में भी आपको पैसे खर्च करने पड़ें. इस वजह से स्टीव एक्सटेंडेड वॉरंटी में पैसे खर्च नहीं करते हैं.

खर्च की एक जरूरी स्ट्रैटेजी जो स्टीव ने अपनाई वो ये थी कि वो कभी भी सबसे सस्ता या सबसे महंगा सामान नहीं खरीदते. वो प्रॉपर रिसर्च के बाद ऐसा सामान खरीदते हैं जो उनकी जरूरत पूरी करे और ठीक से चले. मतलब ये कि वो सामान खरीदते समय कीमत या ब्रांड वैल्यू की जगह उसकी यूटिलिटी देखकर उस पर खर्च करते हैं.

Tags: Business news in hindi, Retirement fund, Retirement savings, Save Money



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