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हाइलाइट्स

शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट आमतौर पर कम जोखिम वाले फाइनेंशियल गोल्स होते हैं.
मिड टर्म इन्वेस्टमेंट गोल्स वे होते हैं जिन्हें आप एक से पांच साल में हासिल करना चाहते हैं.
लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट आमतौर पर ज्यादा जोखिम वाले होते हैं, जिनमें रिटर्न अच्छा मिलता है.

नई दिल्ली. जब भी इन्वेस्टमेंट की बात आती है तो आपके पास अवधि के हिसाब से तीन ऑप्शन होते हैं-शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट. इन तीनों में मूल अंतर अवधि का होता है लेकिन ज्यादातर लोगों को यह कंफ्यूजन रहता है कि उन्हें किसमें इन्वेस्ट करने पर ज्यादा फायदा मिल सकता है. अगर आप भी यही जानना चाहते हैं तो पहले आपको इन तीनों के बीच अंतर को समझना होगा.

निवेश करने के लिए आप जब भी किसी स्कीम को चुनते हैं तो आपको अपने फाइनेंशियल गोल को ध्यान में रखना चाहिए. उसे देखकर ही आपको यह तय करना चाहिए कि आपको किसमें निवेश करना चाहिए. आइए जानते हैं कि शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में क्या अंतर होता है.

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शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट
ये आमतौर पर कम जोखिम वाले फाइनेंशियल गोल्स होते हैं. इनमें आपको रिटर्न तुलनात्मक रूप से कम मिलता है. ये वो गोल्स होते है जिन्हें आप कुछ ही महीनों या 1 से 2 साल की अवधि में हासिल करना चाहते है. जैसे नया फोन खरीदना, ट्रैवलिंग, लोन का पेमेंट करने के लिए या एक इमरजेंसी फंड शुरू करना. इन तक पहुँचने के लिए आपको अपनी इनकम और खर्चों का बजट बनाना होगा. फिर अपने पैसों का एक हिस्सा किसी सेफ और ऐसी इन्वेस्टमेंट स्कीम में जमा करना होगा जहां से आप जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाल सके.

मिड टर्म इन्वेस्टमेंट
ये वो फाइनेंशियल गोल्स होते हैं जिन्हें आप एक से पांच साल में हासिल करना चाहते हैं. इसमें कार खरीदना, एजुकेशन लोन, घर खरीदना या कोई नया बिजनेस शुरू करना आदि शामिल हैं. जब आप इस तरह की स्कीम में निवेश करते हैं तो आपको मार्केट के उतार-चढ़ाव और रिटर्न में बदलावों का सामना भी करना पड़ सकता है. कई बार आपको इनमें बहुत अच्छा रिटर्न देखने को मिलता है. इन गोल्स तक पहुंचने के लिए आपको अपनी इनकम और खर्चों का बजट बनाकर, अपने पैसों का एक हिस्सा किसी सेफ और हाई रिटर्न स्कीम में लगाना होगा. इसके लिए आप म्यूचुअल फंड, FD या कोई दूसरा भरोसेमेंद ऑप्शन चुन सकते है.

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट
लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट उनके लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं जो 5 साल से भी ज्यादा अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग करके चलते हैं. इसमें घर खरीदना, रिटायरमेंट के लिए बचत करना, विदेश में पढ़ाई या भारी लोन चुकाना जैसे फाइनेंशियल गोल शामिल होते हैं. ये इन्वेस्टमेंट आमतौर पर ज्यादा जोखिम वाले होते हैं. आमतौर पर इनमें आपको अच्छा रिटर्न देखने को मिलता है. इन तक पहुंचने के लिए आपको अपनी इनकम और खर्चों का एनालिसिस करना होगा. इसके बाद आपको हर महीने अपनी इनकम का एक हिस्सा ग्रोथ ओरिएंटेड और लंबे समय तक चलने वाले तरीके से इन्वेस्ट करना होगा. इसके लिए आप स्टॉक, बॉन्ड या प्रोविडेंट फंड जैसे इन्वेस्टमेंट ऑप्शन चुन सकते हैं.

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