[ad_1]

हाइलाइट्स

आप शुरुआती बिजनेस के लिए 1 हेक्‍टेयर तालाब की जरूरत होगी.
तालाब के अंदर भी इन्हें नायलॉन बैग में भरकर ही डाला जाता है.
इन्हें तालाब में डायरेक्ट पानी के अंदर नहीं डाला जाता है.

नई दिल्‍ली. शहर में प्राइवेट नौकरी और अंधाधुंध महंगाई के साथ प्रदूषण की मार झेलते युवाओं के लिए यह खबर नई राह दिखाने वाली है. अगर आप भी जिंदगी की जरूरतें पूरी करते-करते 9 टू 5 की जॉब में फंसकर रह गए हैं और इससे बाहर निकलकर कुछ अपना काम करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. शहर से दूर अपने गांव वापस जाकर भी आप लाखों की कमाई कर सकते हैं, जिसके दम पर आप अपने शहरी दोस्‍तों से जल्‍दी अमीर बन जाएंगे और गाड़ी-बंगला भी खरीद लेंगे.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं मोती पालन (Pearl Farming) की. इस बिजनेस को दूरदराज के गांव में भी आसानी से कर सकते हैं और इसमें मुनाफा भी काफी ज्‍यादा होता है. हालांकि, इसके लिए पहले मोती पालन की ट्रेनिंग लेना जरूरी होता है.

ये भी पढ़ें – IMF ने भारत के लिए कह दी ऐसी बात, सुनकर चीन के पेट में होगा दर्द, ग्लोबल इकोनाॅमी में 16% से ज्यादा का योगदान

क्‍या तैयारी करनी होगी
मोती फार्मिंग का बिजनेस करने के लिए जब आप जगह का सिलेक्शन करें, तब इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि वहां पर पानी की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध हो. साथ ही वह जगह परमानेंट हो. कहने का मतलब है कि एक बार फार्म का निर्माण हो जाने के बाद उसे बार-बार इधर से उधर करने की जरूरत न पड़े. लोकेशन भी ऐसी होनी चाहिए जहां पर बिजली कनेक्शन भी अच्छा हो.

कैसे खोजें पर्ल
अब व्यक्ति को चाहिए यह कि वह हेल्थी पर्ल ओयस्टर को ढूंढें. इसके लिए ऐसे फार्म मालिकों से मिल सकता है जो पहले से ही मोती फार्मिंग का बिजनेस कर रहे हैं. इसके अलावा व्यक्ति चाहे तो नदी, तालाब या फिर झील इत्यादि से भी इसे इकट्ठा कर सकता है. इसे आप चाहें तो खुद से भी पकड़ सकते हैं या फिर आप बाल्टी अथवा कंटेनर या फिर दूसरे बर्तन में भी पानी के साथ रख सकते हैं. पर्ल ओयस्टर को इकट्ठा करने के पश्चात आपको इसे प्री कल्चर के लिए रेडी करने की आवश्यकता होती है. इसके लिए आपको इन्हें तकरीबन 2 से 3 दिन तक पानी के साथ इकट्ठा करके रखना होता है. आपको 1 लीटर पानी में एक मूसेल को रखने की जरूरत होती है.

कितने बड़े तालाब की जरूरत
आप शुरुआती बिजनेस के लिए 1 हेक्‍टेयर तालाब की जरूरत होगी. तालाब के अंदर भी इन्हें नायलॉन बैग में भरकर ही डाला जाता है और हर बैग में सिर्फ दो ओयस्‍टर रखे जाते हैं. इन्हें तालाब में डायरेक्ट पानी के अंदर नहीं डाला जाता है, बल्कि बांस के डंडे के द्वारा इन्हें तालाब में टांगा जाता है. 1 हेक्टेयर की जगह में 25,000 से लेकर के 30,000 मुसेल कल्चर किए जाते हैं और तालाब को जैविक खाद दी जाती है. साथ ही समय-समय पर मुसेल की देखभाल भी की जाती है.

अब हार्वेस्टिंग की बारी
मोती फार्मिंग बिजनेस में कल्चर पीरियड खत्म हो जाने के पश्चात सबसे आखरी में मुंसेल को हार्वेस्ट किया जाता है और इतनी प्रक्रिया करने के पश्चात मोती तैयार हो जाता है. अब मोती बेचने के लिए बिल्कुल तैयार हैं. मार्केट में एक मोती की कीमत ₹8 से लेकर ₹12 रुपये होती है. मार्केट में 1 मिलीमीटर से लेकर 20 मिलीमीटर मोती का दाम ₹300 से लेकर ₹1500 के आसपास में होती है.

ये भी पढ़ें – शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए जरूरी खबर, एक्सपर्ट्स ने बताया 2024 में कैसी रहेगी मार्केट की चाल

कितना खर्चा-कितना मुनाफा
छोटे स्तर पर मोती फार्मिंग बिजनेस शुरू करने के लिए आपको ₹100000 तक इन्वेस्टमेंट करने की आवश्यकता होगी. इसके अलावा बड़े स्तर पर पर्ल फार्मिंग बिजनेस शुरू करने के लिए तकरीबन 5 से 6 लाख रुपये की आवश्यकता पड़ सकती है. अब अगर मान लिया जाए कि एक मोती का औसत मूल्‍य 100 रुपये भी है और आपने 30 हजार सीप डाली हैं तालाब में. इसमें से 50 फीसदी सीप भी खराब हो जाता है तो भी आपको 15 हजार सीप में से मोती आपको मिल जाएंगे. एक सीप से 2 मोती निकलते हैं तो आपको 30 हजार मोती मिलेंगे और 100 की औसत कीमत से एक बार में 30 लाख रुपये कमा लेंगे. इसमें से 5 लाख की लागत हटा दी जाए तो 25 लाख रुपये का मुनाफा होगा.

Tags: Business ideas, Business news in hindi, Business opportunities, Pearls Company

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *