Business Idea : नौकरी से दिल ऊब गया है और किसी ऐसे बिजनेस की तलाश में हैं, जहां नुकसान का कोई जोखिम न हो और हजार लगाकर लाख कमाने का मौका मिले तो एक बार स्‍मार्ट खेती की तरफ जरूर रुख कीजिए. अब पारंपरिक फसलों से इतर कुछ ऐसी खेती भी है, जो आपको कम लागत में बंपर मुनाफा दिला सकती है. ऐसा ही एक विकल्‍प है चिया सीड (Chia Seed) की खेती, जिसमें कम लागत के बावजूद बंपर मुनाफा मिलता है.

चिया सीड एक तिलहनी फसल है और अभी इसकी खेती ज्‍यादा नहीं होती है. सेहत के लिए खजाना माना जाने वाला यह छोटा बीज बड़े मुनाफे की पूरी गारंटी देता है. लाइफस्‍टाइल में बदलाव के साथ लोग अब चिया सीड का जमकर इस्‍तेमाल करने लगे हैं. यही कारण है कि इसकी बाजार में लगातार डिमांड बढ़ती जा रही है, जबकि खेती बहुत कम स्‍तर पर होती है. मुनाफा आपकी लागत का कई गुना रहता है. बाजार में डिमांड ज्‍यादा होने और पैदावार कम रहने की वजह से इसकी अच्‍छी कीमत मिल जाती है.

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कैसे होती है चिया की खेती
अच्‍छे उत्‍पादन के बुआई से पहले खेत को अच्‍छी तरह तैयार करना होता है. पहले खेत को पलटने वाले तवा हल से जुताई कराई जाती है फिर मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए कल्‍टीवेटर का इस्‍तेमाल किया जाता है. आखिर में पाटा चलाकर खेत को समतल कर लेते हैं. खेत में नमी बनाने के लिए इसकी हल्‍की सिंचाई करने के बाद बीज बोया जाता है. खेत की मिट्टी बलुई और दोमट है तो आपको अच्‍छी पैदावार मिलेगी.

कहां से खरीदें चिया सीड के बीज
अगर आप इसके बीज खुद जाकर खरीदना चाहते हैं तो सरकारी उद्यानिकी विभाग अथवा अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से ला सकते हैं अथवा Amritanjali ayurved कंपनी के जरिये घर ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं. इसके बीज की बुवाई छिड़कावा विधि और सीड्रिल द्वारा की जाती है. आप चाहे पौधे लगा रहे हों या बीज बो रहे हों, एक से दूसरे की दूरी कम से कम 30 सेंटीमीटर की होनी चाहिए और बीज 1.5 सेंटीमीटर की गहराई में डालना चाहिए, ताकि अंकुरण सही से हो. एक एकड़ खेत में करीब 3 से 4 किलोग्राम चिया सीड के बीज की जरूरत होती है. बीज को कीड़े, फफूंद और गलन से बचाने के लिए 1 किलोग्राम में 2.5 ग्राम थीरम या केप्‍टॉन मिलाया जाता है.

कैसी खाद का होगा इस्‍तेमाल
चिया के पौधों को अच्‍छी से बढ़ने के लिए 10 से 15 टन गोबर की खाद को प्रति हेक्‍टेयर के हिसाब से इस्‍तेमाल करना चाहिए. हल्‍की मिट्टी में 20 से 30 किलो फॉस्‍फोरस, 20 से 25 किलो नाइट्रोजन और 15 से 20 किलो पोटाश मिलाकर भी प्रति हेक्‍टेयर के हिसाब से इस्‍तेमाल करना चाहिए. पौधों को और अच्‍छी ग्रोथ देने के लिए बुवाई के 30 दिन बाद 10 किलोग्राम नाइट्रोजन और डालना चाहिए.

सिंचाई कब करनी चाहिए
वैसे तो खेत की सिंचाई करने के बाद ही आप बुवाई करेंगे, लेकिन बाद में जरूरत और मिट्टी की किस्‍म देखकर समय-समय पर इसकी सिंचाई करते रहना चाहिए. बलुई और दोमट मिट्टी में अमूमन 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है. ध्‍यान रहे कि फसल पकने के दौरान सिंचाई कतई न करें. चिया की फसल काफी मजबूत होती है और इस पर खरपतवार का कोई असर नहीं होता फिर भी ग्रोथ अच्‍छी करने के लिए बुवाई के 25-30 दिन बाद खरपतवार निकाल देना सही रहेगा. अगर आपने बीज का उपचार पहले ही कर दिया है तो इस पर कीट और रोग का कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

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अब फसल काटने का मौका
इसकी फसल 3 से 4 महीने में तैयार हो जाती है और पकने पर इसकी पत्तियां गिर जाती हैं. इसके बाद तने पर सिर्फ बालियां बचती हैं, जैसे सरसों के पौधों पर होता है. फसल काटने के बाद 5-6 दिन इसे धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. बीज को अलग करने के लिए थ्रेसर मशीन या डंडे का उपयोग किया जाता है. आपको प्रति एक करीब 10 क्विंटल चिया बीज मिलेगा.

कितना होगा मुनाफा
एक एकड़ खेत में आपको करीब 10 क्विंटल चिया सीड मिल सकता है. बाजार में इसकी कीमत 1000 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब है. इस तरह आपको करीब 10 लाख रुपये मिलेंगे. इसमें से लागत को हटा दीजिए तो आराम से 7 से 8 लाख का मुनाफा मिल जाएगा. वह भी सिर्फ 3 से 4 महीने के भीतर. इसके बाद आपका खेत खाली हो जाएगा और उसमें दूसरी फसल भी उगा सकते हैं. इसकी बुवाई जून से जुलाई के बीच या फिर अक्‍टूबर से नवंबर के बीच की जा सकती है.

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