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हाइलाइट्स

इंटीग्रेटेड फार्मिंग एक नई कृषि तकनीक है.
कम खेत वाले किसान इसका लाभ ले सकते हैं.
इसमें एक ही जगह पर कई कृषि संबंधित काम होते हैं.

नई दिल्ली. कृषि देश की रीढ़ से कम नहीं है. किसान उगाता है तो देश खाता है, ऐसी बातें हम आमतौर पर सुनते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है इन्हीं किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और दूसरों का पेट भरने वाले खुद भूखे रहने को मजबूर हो जाते हैं. ऐसे में कृषि के तरीकों में बदलाव ही एक उम्मीद दिखाई देती है. इंटीग्रेटेड फार्मिंग ऐसा ही एक तरीका है जिससे किसान कम रिस्क के साथ अच्छा पैसा कमा रहे हैं

अब आप सोच रहे होंगे कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग (Integrated Farming System) क्या होती है. यह कृषि का एक ऐसा मॉडल है जिसमें एक ही जगह पर तरह-तरह की फार्मिंग संबंधित गतिविधियां की जाती हैं. एक ही जगह पर कई तरह की फसलें उगाना, पॉल्ट्री करना और मछली पालन करना इसका हिस्सा है. इससे छोटे किसानों को बहुत लाभ मिलता है. इंटीग्रेटेड फार्मिंग को आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत बढ़ावा दिया जा रहा है.

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क्या हैं इसके फायदे?
कम जमीन वाले किसान खेती की इस नई तकनीक से अपना मुनाफा दोगुना बढ़ा सकते हैं. किसानों एक ही स्थान पर कम खर्च में कई फसले उगा सकते हैं. इसमें नुकसान की आशंका भी कम हो जाती है. खेती का कचरा भी पशुओं के काम आ जाता है. इसमें आपको अलग-अलग कामों को संभालने के लिए कई जगहों पर नहीं जाना पड़ता. आप एक ही खेत में अलग-अलग फसलें, मछलीपालन और पॉल्ट्री करते हैं. यहां से निकला कचरा खाद बनाने के काम आ सकता है.

और क्या लाभ?
बढ़ती आबादी और घटती कृषि योग्य जमीन के दौर में इंटीग्रेटेड फार्मिंग कारगर साबित हो सकती है. फसल के चारा पशुओं के लिए काम आ सकता है. खेती के साथ मछली और मुर्गी पालन करने से उनके लिए दाना पानी का इंतजाम हो जाता है. दलहनी फसलों से खेतों की उपजाऊ क्षमता बढ़ती और इसके बाद सब्जियां उगाने से अच्छी फसल होती है. इस तरीके से किसान अपने निजी इस्तेमाल के लिए भी अनाज व सब्जियां उगा लेते हैं और बाजार में बेचकर कमाई के लिए भी फसल पैदा कर लेते हैं. कम जगह, कम खर्च और कम संसाधन में फसल उगाकर उन्हें बाजार में बेचने से किसानों को अच्छी आय प्राप्त होती है.

उदाहरण
58 वर्षीय किसान सुरेंद्र प्रसाद मेहता ने गया शहर के चंदौती इलाके में तीन बीघा में फॉर्म हाउस बनाया है. वह यहां पर मुर्गी पालन के साथ-साथ मछली पालन, गाय पालन, बत्तख पालन और जैविक विधि से सब्जी की खेती कर रहे हैं. इससे उनकी सालाना कमाई लगभग 4 से 5 लाख रुपए तक हो रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि इन्हें मार्केटिंग के लिए कहीं जाना नहीं पड़ता है. लोग खुद इन के फॉर्म हॉर्स पर पहुंच जाते हैं और शुद्ध सब्जी, मछली, मुर्गा आदि खरीद लेते हैं.

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